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कोयलिया बहुत मतवाली

अर्चना कोहली 'अर्चि' / June 10, 2022

अर्चना कोहली ‘अर्चि’

श्याम वर्ण कोयलिया है बहुत मतवाली

रुचिकर उसको लगती आम्र की डाली।

काली-काली कोयल की ध्वनि है प्यारी

कर्ण में सरगम-सी उसकी बोली न्यारी।।

प्रेम की धुन-सी मन में प्रीत तुम जगाती

विरह से दग्ध हृदय को आह्राद दे जाती।

न कोई रियाज और न श्रोताओं की भीड़

कठिन श्रम करके बनाती नहीं यह नीड़।।

बसंत-दूत बनकर चहुँदिश में छेड़ी तान

फैला दिया पंचम स्वर-सा अद्भुत गान।

सरोजिनी ने पाया भारत कोकिला नाम

तो लता ने भी स्वर-कोकिला-उपनाम।।

काक की तरह भले वर्ण है इसका काला

लेकिन चतुराई में है उसकी भी ये खाला।

काक के अंडे गिरा अपने अंडे रख देती

धोखे से अनजान मादा काक उसे सेती।।

बसंत ऋतु में आम्र में कोपलें जब फूटती

तभी वन-उपवन-झुरमुटों में पिक कूजती।

धरा नहीं वृक्षों को बनाया अपना आवास

डाली डाली पर फुदककर फैलाया हास।।

चिड़ियों की रानी ने संदेश दिया अनमोल

जग में केवल आकर्षित करते मीठे बोल।   

रचनाकारो का प्रिय विषय कोयल ही होती

कुहू-कुहू के द्वारा नव स्वप्न दिलों में बोती।।

चित्र आभार: pinerest

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