
हमारी संस्कृति
October 28, 2023
अर्चना कोहली 'अर्चि' / June 26, 2021
जैसे-जैसे उम्र हम सबकी बढ़ती जाती
वैसे-वैसे तनु सुंदरता क्षीण होती जाती।
लेकिन सीरत तो आजीवन साथ निभाती
सत्कर्मों से आलोकित सकल सृष्टि कर जाती ।।
मन की सुंदरता से ही जग सुंदर बन पाएगा
तभी उत्थान डगर पर देश चलता जाएगा।
कथनी-करनी में जब कोई भेद न रह पाता
तभी संकीर्ण विचारों की श्रृंखला से नाता टूट जाता।।
मन सुंदरता से ही अभी भी मानवता शेष है
परहित से ही जग में अद्भुत सौंदर्य वास है।
सुंदर कर्मों की बदौलत ही हमारा नाम हुआ
सूरत से बढ़कर सीरत को ही सबने मान दिया।।
विश्वबंधुत्व-समभावना का प्रसार जग में होगा
तभी तो सर्वत्र ही मानवता का वास रहेगा।
संघर्ष कठिन डगर से जब मन विचलित होंगे
तभी सुंदर मनवाले राह हमारी सरल बनायेंगे।।
मन-सुंदरता से ही घर-घर में उल्लास छाया
इसी से ही जग में अप्रतिम सौंदर्य-सा छा गया।
जैसा हमारा मन होगा वैसे ही विचार होंगे
कलुषित विचारों से भला ईश-प्रिय कैसे बनेंगे।।
आंतरिक सुंदरता हृदय-गहराइयों में बसी रहती
इस कारण जग कल्याण-भावना सर्वोपरि होती।
मन सुंदर होने से जग में हर चीज सुंदर लगती
उत्थान डगर पर चल तभी तो देश प्रगति होती।।
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