
हमारी संस्कृति
October 28, 2023
अर्चना कोहली 'अर्चि' / June 12, 2021
हर परिस्थिति में सेवा धर्म सर्वोपरि जाना है
मानव का परहित करने का मन में ठाना है।
दूसरों की खातिर इन्होंने निज खुशियां तज दी
नकारात्मकता सकारात्मकता में बदल ली।
स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से सभी कार्य करते हैं
जाती-पाती ईर्ष्या-द्वेष दीवार से कोसों दूर हैं।
संघर्ष की तेज भट्ठी से भी वे नहीं घबराते हैं
असहायों के सहाय बनकर ही वे उभरते हैं।
सबकी सेवा करने के लिए स्वयंसेवक बने हैं
मानवता-डोर इनके हाथों में ही सुरक्षित है।
देवदूत सम बिना कहे भलाई करते जाते हैं
जान दाँव पर लगाने से भी नहीं झिझकते हैं।
कार्य को स्वयंसेवक के छोटा न कोई मानो
इनके कर्म को महान तपस्या प्रतीक जानो।
समर्पण भाव की ये अद्भुत मिसाल माने जाते
कुंदन सा अपनी आभा से सबको रोशन करते।
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