
हमारी संस्कृति
October 28, 2023
अर्चना कोहली 'अर्चि' / June 10, 2016
मुठ्ठी में ख्वाबों को भर लेने दो।
पंछियों की तरह चहकने दो।
मुठ्ठी में सपनो को भर लेने दो
ख्वाबों को हकीकत में ढलने दो।।
मुठ्ठी से ख्वाब फिसलने मत दो
मुठ्ठी में कैद तकदीर को पंख दो।
हकीकत के धरातल पर आने दो
सपनों को ढलने का अवसर दो।।
खुलकर जीने की राह दिखाओ
बचपन को कभी मुरझाने मत दो।
किताबों के बोझ तले दबने मत दो
खुशियों को मुठ्ठियों में भर लेने दो।।
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