

Poems

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रावण में भी राम हैं
अर्चना कोहली 'अर्चि' / August 30, 2025
कैसा कलयुग आज है, छिपे आड़ में राम।
चीर-हरण छिपकर करें, रावण हो बदनाम।।
मात्र कर्म के भेद से, बदले उनके नाम।
मन में ही दोनों बसे, रावण हो या राम।।
जैसा करते काम हैं, वैसा हो परिणाम।
तुच्छ भाव जो भी रखें, गिरते वही धड़ाम।।
माया के ही लोभ में , बिके लोग हैं जो आज।
पलड़ा भारी झूठ का, घूमे कितने बाज।।
छिपे दनुज में ईश हैं, कर लो तुम पहचान।
खिलता नीरज पंक में, इसका रखना ध्यान।।
पुतले रावण के जलें, प्रभु का हुआ बखान।
करना सोच-विचार तुम, क्यों है उनका गान।।
किधर बचे अब राम है, रावण का अब राज।
अंतस भरे विकार हैं, उनका बजता साज।।
खंडित सब संस्कार हैं, करते दीन विलाप।
क्यों अवनति पथ पर चलें, बदलो खुद को आप।।
अपना लेना सत्य को, हिंसा करना छोड़।
मंथन करना मन यही, सदा धर्म से जोड़।।
राह बुरी अब त्याग दे, ईर्ष्या का कर दाह।
करुणा सबके प्रति रखें, मिलती खुशी अथाह।।
अर्चना कोहली 'अर्चि' (नोएडा)
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